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रविवार, 25 मार्च 2012

जल की दशा और महत्व

जल का महत्व :

जल हमारे जीवन और प्रकृति के लिए बहुत जरुरी है, इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हम लोग बिना कुछ खाए पिए कई दिनों तक रह सकते हैं पर बिना जल के १-२ दिन से ज्यादा जीविन नहीं रह पाएंगे। मनुष्य में शरीर में जल की मात्र ७०% होती है, धरती का ७०.९% भाग जल से घिरा है, लेकिन ये जल खारा होने के कारण पीने के योग्य नहीं है। धरती पर उपलब्ध समस्त जल का १.७% हिस्सा भूमि में पाया जाता है जिसे भूमिगत जल कहते हैं और यही जल हम अपने दैनिक उपयोग में प्रयोग और बेकार करते हैं। दुनिया के 1.4 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलता है। 
प्यासे लोगों से ज्यादा कौन इसके महत्व को समझ  सकता है !

पृथ्वी पर पैदा होने वाली सभी वनस्पतियां भी जलजन्य है। आलू में और अनन्नास में 80 प्रतिशत और टमाटर में ९५% पानी है। पीने के लिए मानव को प्रतिदिन कम से कम पांच लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी चाहिए। जल का महत्व तो वही जान सकता है जिसको जल मिलने में बहुत कठिनाई होती है, ये उन लोगों को अच्छी तरह से पता है जो कई किलोमीटर चलकर बस कुछ लीटर ही जल अपने घर को ला पाते हैं। अतः हम कह सकते हैं की जल के बिना हमारा जीवन बेकार या अधूरा है ।

जल का दुरूपयोग : 

जल का सबसे ज्यादा दुरूपयोग हम इंसानों द्वारा ही किया जाता है और खास कर ऐसे लोग जिनको जल की कमी कभी महसूस नहीं हुई या हम कह सकते है जनके पास जल पाने के पूरे सुलभ साधन हैं। इजरायल में औसतन 10 सेंटीमीटर वर्षा होती है जिससे से वह इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात करता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटीमीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद सिंचाई के लिए जरूरी जल की कमी बनी रहती है। एक लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है, जबकि एक किलो गेहूं उगाने के लिए एक हजार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए चार हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

जल का बेतहासा होता दुरूपयोग फैक्ट्री और सीवर द्वारा
मुंबई में रोज गाडि़यां धोने में ही 50 लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पाइपलाइनों के वॉल्व की खराबी के कारण 17 से 44 प्रतिशत पानी प्रतिदिन बेकार बह जाता है। भूमिगत और नदी के  जल का 60वां हिस्सा खेती और उद्योगों में खपत होता है। बाकी का 40वां हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ-सफाई में खर्च करते हैं। यदि ब्रश करते समय नल खुला रह गया है तो पांच मिनट में करीब 25 से 30 लीटर पानी बरबाद होता है। बॉथ टब में नहाते समय धनिक वर्ग 300 से 500 लीटर पानी गटर में बहा देते हैं। मध्यम वर्ग भी इस मामले में पीछे नहीं हैं जो नहाते समय 100 से 150 पानी लीटर बरबाद कर देता है। इसी तरह वर्षा का जल भी नालियों में बहकर नदी में और नदी समुद्र में चला जाता है, इस जल को तालाबों पोखरों में इकठ्ठा कर हमें भूमिगत जल का स्तर बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए और बहने से रोकना चाहिए। कभी हम लोगों ने सोचा कि यदि इस पानी को अभी सहेजकर न रखा गया तो भविष्य में क्या होगा और कैसे पूरी होगी हमारी पानी की आवश्यकता। हमें ये याद रखना चाहिए की प्रकृति के खजाने से हम जितना पानी लेते हैं उसे वापस भी हमें ही लौटाना होता है। 

हमारा जल अमृत या जहर  ?

आज जल अमृत है या जहर ऐसा कह पाना बहुत मुश्किल है, आज जल की गुणवत्ता में बहुत दोष आ चूका है। सामान्यतः हम जो साफ पानी पीते हैं उसमे भी ना जाने कितनी अशुद्धियाँ होती हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं और हमको बीमार बना देती हैं। 

जल की कमी के कारण गंदा जल पीने को मजबूर ये अफ्रीकी बच्चे
भारत में तक़रीबन ४०-५० परसेंट लोगों को जो बीमारियाँ होती हैं उसका कारण अशुद्ध, गन्दा और परजीवी युक्त जल ही होता है कभी कभी ये प्रदूषित जल जान भी ले लेता है। पानीजन्य रोगों से विश्व में हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है। विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में प्रति वर्ष 6 अरब लीटर बोतलबंद पानी मनुष्य द्वारा पीने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। अब तो बहुत से आदमी भी यात्रा के समय बोतल बंद पानी पीना पसंद करता है जिसकी कीमत 10-20 रुपये प्रति लीटर होती है। बेचारा ग्रामीण और गाव के गरीब लोग क्या 15 रुए बोतल का पानी खरीद कर पी सकते हैं ? जिनके पास एक जून की रोटी के लिए भी पैसे नहीं हो ? जल में गंदगी हर जगह है चाहे वो गाँव हो या शहर और ऐसे जल को गरीब, अभावयुक्त तथा और भी कई लोग पीते ही हैं, वो उनकी मजबूरी है और अज्ञानता भी। 
        अतः मई ये कहने में संकोच कतई नहीं करूँगा की हमारा जल धीरे धीरे जहर बनता जा रहा है, फिर भी ये प्यासे के लिए अमृत के सामान है। 



( इस लेख के कुछ तथ्य और चित्र मैंने गूगल से सर्च कर के खोजा है उसके लिए गूगल का आभार ) 


5 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut accha lekh likha hai, jal me pradushan ham logo ki laparwahi aur agyanta ke karan hai. Sabko iska samadhan khojana hoga.

    DEEPAK KUMAR

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    1. You are Right Friend, Jal kya sabhee pradushan manav nirmit hain aur maanav ko hi isase nuksaan hai aur Iskaa samdhan bhee manav ko hi karna hoga.

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  2. Ek sarahneey aur vichar karne vali post Sandeep bhai aapke dwara. ye Accha prayas hai.

    Raj Kumar from Basti

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  3. उत्तर
    1. आपका धन्यवाद मैडम जी, जल के विषय मे कह्ने के लिये बहुत कुछ बाते है। पर जरुरी ये है कि हम सब बात कम करे और काम (जल की बचत्)ज्यादा।

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