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गुरुवार, 22 मार्च 2012

बेरोजगारी भत्ता, अच्छा या बुरा ?

        उत्तर प्रदेश मे 2012 के चुनाव मे मुलायम सिंह यादव के दल समाजवादी पार्टी को भारी बहुमत मिला जिसका एक कारण युवाओ का इस पार्टी मे झुकाव रहा, और इसके भी कई कारण रहे पर बेरोजगारी भत्ता प्रमुख कारण था. 
सेवायोजन कार्यलय मे पंजीकरन के लिये बेरोजगार युवाओ की लम्बी कतार

        

        अब जब समाजवादी पार्टी की सरकार बन गयी तो मुख्यमंत्री ने इसके लिये उम्र सीमा 35 साल और उससे अधिक रखी है। इससे काफी युवाओ में निरासा फ़ैल रही है क्योकि मुख्यमंत्री ने उन्हें धोखा दिया ऐसा उनका और मेरा भी सोचना है, और इस भत्ते के लिये रोजगार कार्यालय मे लाइन लगाकर, धक्के और लाठी खाकर उन लोगों ने अपना पंजीकरन करवाया था। 

आयु का निर्धारन होने के बाद लगी बेरोजगारोन की कतार छोटी हो गयी









बेरोजगारी भत्ता के लिये नियम् (मेरे अनुसार):-

1) सबसे पहले इसके लिये उम्र सीमा कम से कम 27-28 साल होनी चाहिये। 
2) इसके लिये योग्यता कम से कम स्नातक पास होनी चाहिये। 
3) इसके लिये अधिकतम उम्र सीमा 35 से 40 साल होनी चाहिये। 
4) ऐसे लोग जो शादीशुदा और अपनी पढाई छोड चुके हो, अयोग्या घोसित किये जाये। उंनको बेरोजगार नही माना जाये। 
5) कौन लोग बेरोजगार हैं और कौन लोग नहीं इसके बारे मे सही सही मानक बनाया जाये , और उन उनकी पह्चान की जाये। 

इसकी अच्छाई :

1) योग्य और निर्धन युवाओ की कुछ या काफी हद तक मदद करना। 
2) इसके द्वारा प्राप्त राशि से युवा लोग पुस्तके, वैकेंसी फोर्म आदि खरीद सकते हैं जिससे उनके घर वालो पर कुछ कम बोझ पडेगा।
3) ये जरुरतमन्दो और योग्या विद्यार्थियो के लिये संजीवनी के समान है।

इसके अवगुण् :

1) भत्ता पाने वाले कुछ युवाओ मे अपने भविस्य के प्रति लापरवाही की भावना उत्पन्न हो सकती है, अर्थात युवाओ का ध्यान भटक भी सकता है।
2) सरकार की पह्ली प्रथमिकता योग्य और अच्छे युवाओ को नौकरी देना होना चाहिये ना कि बेरोजगारी भत्ता। 
3) जब कोइ राजनीतिक लाभ लेना होगा तो सत्ता पर बैठे लोग कहेंगे कि हमने बेरोजगारी भत्ता दिया है अर्थात इसको राजनीतिक मुद्दा बनाया जायेगा।
4) इसके लिये राज्य के राजस्व से काफी रुपये खर्च होंगे, जोकि राज्य की व्यस्था को कमजोर करेंगे।

 मेरी बात :
 क्या वाकई मे समाजवादी पार्टी की सरकार ने अधिकतर युवाओ के साथ धोखा दिया है ??
 क्या बेरोजगारी भत्ता से सभी भत्ता पाने वाले छात्रो का कल्याण हो पायेगा ?
 क्या छात्रो भत्ता देकर बह्लाया और फुसलाया नहीं जा रहा ?
 क्या ये छात्रो के साथ एक मजाक है या उनकी भलाई के लिये किया गया एक काम ?


( ये मेरा पह्ला लेख है, ब्लोगिंग की दुनिया मे और इसमे कई गल्तिया हुई हैं उसके लिये मै क्षमा प्रार्थी हू )

3 टिप्‍पणियां:

  1. Bahot achha prayaas hai Sani bhai... Meri or se aapko haardik Shubhkaamnaayein!

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  2. Dhanyavad prataanshu bhaiya, Mere Blog par pahla comment likhkar muje utsahit karne ke liye

    जवाब देंहटाएं
  3. बेटा है इंजीनियर, डाक्टर और मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर लेकिन पिता अभी भी बेरोजगार हैं। एक हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता पाने के लिए क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। शिक्षा का पतन कहें या बढ़ती बेरोजगारी की मार जो बेटे को उच्च शिक्षा दिलाने के बाद पिता को बेरोजगारी भत्ता की लाइन में लगना पड़ा। यही नहीं पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने वाला होमगार्ड भी स्वयं को बेरोजगार मानता है, इसीलिए उसे भी बेरोजगारी भत्ता की इच्छा लेकर लाइन में लगना पड़ा।

    चंद्र घाट पांडेय सुबह आठ बजे से लाइन में लगे हैं। बेटे के बारे में पूछने पर फख्र से बताते हैं कि वह दिल्ली में डाक्टर है। यहां क्यों आए हैं के प्रश्न पर हंसते हुए कहते हैं कि मैं तो बेरोजगार हूं, सरकार ने बेरोजगारों को भत्ता देने के लिए कहा है इसलिए आया हूं। बेटा आर्थिक मदद नहीं कर रहा है क्या? व्यंगात्मक लहजे से कहते है फ्री में मिलने वाला एक हजार रुपये काटेगा नहीं कुछ भला ही करेगा। कुछ ऐसा ही फूलपुर से आए अब्दुल वदुद के साथ भी है। 70 बसंत देखने वाले अब्दुल ने 1966 में इंटरमीडिएट किया था। बेटा दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्य करता है। स्वयं भी कंपनी से वीआरएस ले कर पेंशन पा रहे हैं, लेकिन अभी भी बेरोजगार हैं व रजिस्ट्रेशन के लिए सुबह से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
    Ye kaisi halat ho rahi hai, baccho ke maata pita kee, Aur inme lalach bee jag gaya hai, Inko Vridhavastha pensan milna chahiye ya Berojgaari bhatta?????? News padhne ke baad mujko bhee kuhc samajh nahi aa raha hai.

    (By Allahabad Jagaran News paper)

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